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नज्म,कैफी आजमी,उर्दू के शायर की,

 'इतना तो जिन्दगी में किसी की खलल पड़े,   हंंसने से हो सुकूं ना रोने से कल पडे़,    जिस तरह से हंस रहा हूंँ मैं, पी-पी के अश्के गम,     यूं दूसरा हंसे तो कलेजा  निकल पडे़।'

मेरा भारत महान

 'मेरा भारत महान।'